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मिडिल ईस्ट संकट का असर: छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर लगी लिमिट, पंपों को मिले निर्देश

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव ने अब भारत में ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित कई जिलों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत की आशंका गहरा गई है, जिसके चलते पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल पंप संचालकों को मौखिक रूप से ईंधन का वितरण सीमित करने के निर्देश दिए हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के डर से कंपनियां अब स्टॉक बचाने की रणनीति पर काम कर रही हैं, ताकि आपात स्थिति में सप्लाई पूरी तरह ठप न हो।

रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोल पंप मालिकों को स्पष्ट किया गया है कि वे एक वाहन को उसकी क्षमता के अनुसार एक निश्चित सीमा तक ही ईंधन उपलब्ध कराएं। इस निर्देश का उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और ईंधन की राशनिंग करना है ताकि सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से पेट्रोल-डीजल मिल सके। कलेक्टोरेट और स्थानीय प्रशासन ने भी स्थिति पर नजर बना रखी है, क्योंकि आपूर्ति में इस कटौती के कारण कई पंपों पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड नजर आने लगे हैं, जिससे आम जनता के बीच अफरा-तफरी का माहौल है।
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार, कंपनियों से मिलने वाली सप्लाई में पिछले कुछ दिनों से 30% से 40% तक की कटौती की गई है। छत्तीसगढ़ में इस स्थिति के कारण कृषि और परिवहन क्षेत्र पर भी बुरा प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से पैनिक न करने और केवल आवश्यकतानुसार ही ईंधन खरीदने की अपील की है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह पाबंदी कब तक जारी रहेगी, लेकिन मिडिल ईस्ट में तनाव कम न होने तक ईंधन की यह राशनिंग जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।







