CG NEWS : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया है। यह हादसा अब एक बड़ी त्रासदी में बदल चुका है, जिसमें अब तक 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई घायल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
अचानक हुआ विस्फोट
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्लांट के बॉयलर/ट्यूब में अचानक विस्फोट हुआ, जिससे वहां काम कर रहे मजदूरों को बचने का मौका तक नहीं मिला। धमाका इतना तेज था कि कई मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई गंभीर रूप से झुलस गए। विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई।
राहत-बचाव कार्य जारी
हादसे के बाद प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। राहत और बचाव दलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उनकी जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। कई घायलों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासन ने मृतकों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तेज कर दी है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में शवों का परीक्षण जारी है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। शुरुआती जांच में सुरक्षा मानकों में लापरवाही और तकनीकी खामियों की आशंका जताई जा रही है।
मुआवजे की घोषणा
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की है। वहीं, प्रधानमंत्री द्वारा मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता स्वीकृत की गई है।
कंपनी प्रबंधन ने भी सहायता की घोषणा करते हुए मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये, रोजगार सहयोग और घायलों को 15 लाख रुपये देने की बात कही है। इस तरह प्रत्येक मृतक के परिवार को कुल 42 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी।
कई राज्यों के मजदूरों की मौत
इस हादसे में छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के मजदूर शामिल हैं। अधिकांश मजदूर रोजी-रोटी कमाने के लिए दूसरे राज्यों से यहां आए थे। इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है और गांव-गांव में मातम का माहौल है।
परिजन जहां अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की मांग भी कर रहे हैं। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का खुलासा रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करता है।








