CG NEWS : बिलासपुर। 27 जनवरी 2026 : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायगढ़ से जुड़े एक सनसनीखेज वैवाहिक विवाद में बड़ा आदेश दिया है। तलाक मामले में पति द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज को नजरअंदाज करने पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और पूरे मामले की दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
मामला रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र का है। महासमुंद निवासी महिला की शादी वर्ष 2012 में रायगढ़ के युवक से हुई थी। निजी कंपनी में कार्यरत पति के कारण दोनों तमनार में रह रहे थे। वर्ष 2015 में दंपती के बेटे का जन्म हुआ, लेकिन वर्ष 2017 में पत्नी मायके गई और फिर ससुराल नहीं लौटी।
इसके बाद रिश्ते पूरी तरह टूट गए। पत्नी ने पति पर मारपीट और दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए भरण-पोषण का केस दायर किया। जवाब में पति ने फैमिली कोर्ट में क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की याचिका दाखिल की।
पति का आरोप है कि पत्नी के अन्य पुरुषों से अवैध संबंध थे और वह न्यूड वीडियो कॉल व अश्लील चैटिंग करती थी। इन आरोपों के समर्थन में पति ने बेडरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग सीडी के रूप में कोर्ट में पेश की। हालांकि फैमिली कोर्ट ने इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को महत्व नहीं दिया और तलाक की याचिका खारिज कर दी।
फैमिली कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अनदेखी नहीं की जा सकती और उनकी विधिवत जांच जरूरी है। इसी आधार पर कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।
वहीं पत्नी ने भी पलटवार करते हुए पति पर बिना सहमति के बेडरूम में कैमरा लगाने, निजता के उल्लंघन, मारपीट और दहेज उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के दावों की निष्पक्ष, गहन और कानूनी जांच के निर्देश दिए हैं।
यह मामला अब निजता बनाम सबूत, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग की वैधता और वैवाहिक क्रूरता की सीमा जैसे अहम सवालों पर नई बहस छेड़ रहा है। अब सभी की निगाहें फैमिली कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।








