CG NEWS : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पॉक्सो एक्ट और अपहरण के मामले में 20 साल की सजा काट रहे युवक दीपक वैष्णव को सभी आरोपों से बरी कर दिया है।
यह निर्णय चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से संपर्क था।
सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि पीड़िता स्वयं अपनी इच्छा से आरोपी के साथ मुंगेली, रायपुर और हैदराबाद जैसे विभिन्न शहरों में लगभग एक महीने तक रही। इस दौरान उसने कहीं भी विरोध दर्ज नहीं कराया।
अदालत ने मेडिकल और एफएसएल रिपोर्ट को भी अहम माना, जो नेगेटिव पाई गई। साथ ही पीड़िता के शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान भी नहीं मिले, जिसे कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की बड़ी कमजोरी माना।
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई नाबालिग (विशेषकर 16 वर्ष के आसपास) बिना किसी दबाव या प्रलोभन के अपनी इच्छा से किसी के साथ जाती है, तो इसे अपहरण की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।
इन सभी तथ्यों और पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव को देखते हुए हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह रद्द कर दिया और आरोपी दीपक वैष्णव को तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया।








