Raipur: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में 'घर वापसी' का एक बड़ा कार्यक्रम संपन्न हुआ, जहाँ 14 परिवारों के कुल 66 सदस्यों ने स्वेच्छा से सनातन धर्म में वापसी की है। इन परिवारों ने पूर्व में किन्हीं कारणों से अन्य धर्म स्वीकार कर लिया था, लेकिन अब अपनी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय लिया। पंडरिया क्षेत्र में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में हिंदू रीति-रिवाजों के साथ शुद्धिकरण यज्ञ किया गया। इस घटना ने क्षेत्र में सांस्कृतिक और धार्मिक चर्चाओं को एक नई दिशा दी है।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने वापस लौटे परिवारों का आत्मीय स्वागत किया। विधायक बोहरा ने भारतीय परंपरा का निर्वहन करते हुए खुद अपने हाथों से लौटे हुए सदस्यों के पैर पखारे और उन्हें तिलक लगाकर अभिनंदन किया। विधायक ने इस अवसर पर कहा कि अपनी संस्कृति और पूर्वजों के धर्म की ओर लौटना गौरव की बात है। उन्होंने परिवारों को आश्वस्त किया कि समाज में उन्हें पूर्ण सम्मान और सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान मंत्रों के उच्चारण के बीच सभी सदस्यों ने गायत्री मंत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। घर वापसी करने वाले सदस्यों ने साझा किया कि वे अपनी मूल पहचान और रीति-रिवाजों के प्रति जुड़ाव महसूस कर रहे थे, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया। स्थानीय हिंदू संगठनों और ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की और फूल-मालाओं से सभी का स्वागत किया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी संख्या में ग्रामीण इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर और कवर्धा जैसे क्षेत्रों में 'घर वापसी' के ऐसे कार्यक्रम सांस्कृतिक अस्मिता को बचाने के प्रयासों का हिस्सा हैं। विधायक भावना बोहरा ने इस अवसर पर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म और संस्कृति के साथ-साथ इन परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर भी पूरा ध्यान दिया जाएगा। यह आयोजन न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान था, बल्कि एक सामाजिक एकजुटता का संदेश भी था, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश के गलियारों में सुनाई दे रही है।



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