रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। नई पर्यटन नीति के तहत सरकार ने बस्तर, जशपुर और सरगुजा संभाग के प्रमुख पर्यटन स्थलों के संचालन और विकास की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र (PPP मॉडल) को सौंपने का निर्णय लिया है। पहले चरण में 20 प्रमुख स्थलों का चयन किया गया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य इन दुर्गम लेकिन सुंदर क्षेत्रों में आधुनिक सुख-सुविधाओं का विस्तार करना और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करना है।
इस नई नीति में इको-टूरिज्म और एडवेंचर स्पोर्ट्स को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। निजी निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार भारी सब्सिडी का प्रावधान कर रही है। आदिवासी और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए सामान्य क्षेत्रों के मुकाबले 10% अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा, जिससे कुल सब्सिडी 45% से 55% तक पहुँच सकती है। इसके तहत होटल, रिसॉर्ट्स, वेलनेस सेंटर और वाटर स्पोर्ट्स जैसे प्रोजेक्ट्स को पीपीपी मॉडल पर विकसित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल पर्यटन बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। 'होमस्टे नीति 2025-30' को भी इस योजना के साथ जोड़ा गया है, जिससे ग्रामीण परिवारों को अपनी आय बढ़ाने का मौका मिलेगा। बस्तर की चित्रकोट, सरगुजा के मैनपाट और जशपुर के एडवेंचर पॉइंट्स को अब निजी कंपनियां पेशेवर तरीके से संचालित करेंगी, जिससे पर्यटकों को बेहतर सेवाएं और सुरक्षा मिल सकेगी।
नई पर्यटन नीति अगले वित्तीय वर्ष से पूरी तरह लागू कर दी जाएगी। इसके तहत केवल पर्यटन स्थलों का विकास ही नहीं, बल्कि 'पर्यटन ऑन व्हील्स' और धार्मिक सर्किट जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी काम शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य पर्यटन को एक सशक्त उद्योग के रूप में स्थापित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था को मिल सके।








