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CG High Court: रहस्यमयी तरीके से लापता हुई नाबालिग बेटी, बेबस पिता ने न्याय के लिए लगाई 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल, पिता पहुंचा हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ में एक नाबालिग बेटी के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने के बाद उसके पिता ने न्याय की गुहार लगाते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर की है। पीड़ित पिता का आरोप है कि उसकी बेटी काफी समय से गायब है और स्थानीय पुलिस उसे ढूंढने में नाकाम रही है। पुलिस की सुस्त कार्रवाई से तंग आकर परिवार को अब न्यायालय से अंतिम उम्मीद है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, नाबालिग लड़की घर से अचानक लापता हो गई थी, जिसके बाद परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, लंबे समय के बाद भी पुलिस लड़की का सुराग लगाने में विफल रही। याचिका में कहा गया है कि बेटी की सुरक्षा को लेकर परिवार बेहद चिंतित है और उन्हें डर है कि वह किसी अनहोनी या मानव तस्करी का शिकार न हो गई हो।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus) का महत्व
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका तब दायर की जाती है जब किसी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया हो या वह लापता हो और पुलिस उसे खोजने में असमर्थ हो। इस याचिका के जरिए हाईकोर्ट पुलिस और प्रशासन को आदेश देता है कि लापता व्यक्ति को एक निश्चित समय के भीतर कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक शक्तिशाली संवैधानिक हथियार है।
कोर्ट के हस्तक्षेप से जगी उम्मीद
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट इस पर सख्त रुख अपना सकता है। कोर्ट अक्सर ऐसे मामलों में गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) से स्टेटस रिपोर्ट तलब करता है। पीड़ित परिवार का मानना है कि कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस जांच में तेजी आएगी और उनकी मासूम बेटी सुरक्षित घर वापस लौट सकेगी।







