बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू के संक्रमण ने पोल्ट्री उद्योग की कमर तोड़ दी है। हाल ही में आई केंद्रीय टीम की जांच रिपोर्ट ने प्रदेश में हुए भारी नुकसान का खुलासा किया है। आंकड़ों के मुताबिक, संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए अब तक 1 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। इस जानलेवा वायरस के प्रकोप के कारण न केवल मुर्गियों की मौत हुई है, बल्कि सुरक्षा मानकों के तहत भारी मात्रा में स्टॉक को नष्ट करना पड़ा है, जिससे व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
हजारों मुर्गियां और अंडे किए गए नष्ट
प्रशासन और पशुपालन विभाग ने वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर 'कलिंग' (Culling) अभियान चलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 22,808 मुर्गियों को वैज्ञानिक पद्धति से मारकर दफन कर दिया गया है। इतना ही नहीं, संक्रमण के दायरे में आए 25,896 अंडों को भी पूरी तरह नष्ट किया गया है ताकि यह वायरस इंसानों या अन्य पक्षियों तक न पहुंच सके। प्रभावित इलाकों को 'डेंजर ज़ोन' घोषित कर वहां कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
केंद्रीय टीम की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
दिल्ली से आई केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बायो-सिक्योरिटी में चूक और समय पर सूचना न मिलना संक्रमण फैलने के मुख्य कारण रहे। इस संकट की वजह से स्थानीय पोल्ट्री फार्मर्स को भारी आर्थिक चपत लगी है। सरकार अब प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पर विचार कर रही है, लेकिन मौजूदा नुकसान की भरपाई करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सावधानी और सरकारी निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने आम जनता को सलाह दी है कि पक्षियों की असामान्य मौत दिखने पर तुरंत इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दें। चिकन और अंडों के सेवन को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रभावित जिलों में पोल्ट्री उत्पादों के परिवहन पर फिलहाल पाबंदी लगा दी गई है। विशेषज्ञ लगातार सैंपलिंग कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वायरस का स्ट्रेन बदल तो नहीं रहा है। अगले कुछ दिन छत्तीसगढ़ के पोल्ट्री बाजार के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।








