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बड़ा खुलासा: कलाम की जगह अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति बनाना चाहती थी BJP, आडवाणी को PM बनाने की थी तैयारी...

भारतीय राजनीति के गलियारों से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। एक नई प्रकाशित किताब में यह बात कही गई है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक समय पर एपीजे अब्दुल कलाम के स्थान पर अटल बिहारी वाजपेयी को देश का राष्ट्रपति बनाना चाहती थी। इस खुलासे ने राजनीतिक विश्लेषकों और इतिहास के जानकारों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या उस समय भाजपा के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की कोई बड़ी योजना चल रही थी?

आडवाणी को PM बनाने की थी रणनीति
किताब के अनुसार, भाजपा के शीर्ष रणनीतिकारों ने अटलजी से संपर्क किया था और उनसे आग्रह किया था कि वे राष्ट्रपति का पद स्वीकार करें। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य लालकृष्ण आडवाणी के लिए प्रधानमंत्री पद का रास्ता साफ करना था। पार्टी चाहती थी कि वाजपेयी जी की गरिमा का उपयोग राष्ट्रपति भवन के लिए किया जाए और सरकार की कमान आडवाणी जी के हाथों में सौंपी जाए, जो उस समय पार्टी के सबसे शक्तिशाली संगठनकर्ता माने जाते थे।
अटलजी का प्रस्ताव पर रुख
दावे के मुताबिक, जब यह प्रस्ताव अटल बिहारी वाजपेयी के सामने रखा गया, तो उन्होंने इसे विनम्रता से अस्वीकार कर दिया होगा या इस पर असहमति जताई होगी। किताब में इस बात का विस्तार से वर्णन है कि कैसे उस दौर में भाजपा के भीतर सत्ता के दो केंद्रों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, अंततः डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को ही राष्ट्रपति पद के लिए चुना गया, जिन्होंने देश के सर्वोच्च पद की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।
कलाम बनाम वाजपेयी: एक ऐतिहासिक मोड़
यदि उस समय वाजपेयी जी राष्ट्रपति बनते, तो भारतीय राजनीति का स्वरूप आज बिल्कुल अलग होता। डॉ. कलाम 'मिसाइल मैन' के रूप में एक गैर-राजनीतिक चेहरे थे, जिन्हें व्यापक जनसमर्थन प्राप्त था। किताब का यह दावा संकेत देता है कि गठबंधन सरकार के दौर में भाजपा अपनी आंतरिक गुटबाजी और भविष्य की लीडरशिप को लेकर कितनी गंभीर और सक्रिय थी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस खुलासे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। पुरानी पीढ़ी के नेताओं और उस दौर के चश्मदीदों के हवाले से इस दावे की सत्यता पर चर्चा हो रही है। यह जानकारी न केवल अटल-आडवाणी के रिश्तों के नए आयाम खोलती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे महत्वपूर्ण पदों के चयन के पीछे गहरी राजनीतिक बिसात बिछाई जाती है।







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