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धान के कटोरे छत्तीसगढ़ में महंगा हुआ चावल, 15 से 20 रुपए प्रति किलो तक बढ़े दाम; रसोई से रेस्टोरेंट तक बिगड़ा बजट

धान के कटोरे के रूप में पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ में इस वक्त चावल की महंगाई ने आम आदमी की थाली का गणित बिगाड़ दिया है। बिलासपुर समेत प्रदेश के खुले बाजारों में चावल के दामों में अचानक भारी उछाल देखने को मिला है। पिछले महज एक महीने के भीतर चावल की कई किस्मों के भाव 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं, जिससे घरेलू रसोई से लेकर रेस्टोरेंट और होटलों तक का बजट गड़बड़ा गया है।

आम चावल से लेकर लोकप्रिय किस्में हुई महंगी
बाजार से मिल रही जानकारी के मुताबिक, जो सामान्य उसना और खंडा चावल पहले 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिकते थे, वे अब बढ़कर 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। हालांकि, इस महंगाई के बीच एक दिलचस्प बात यह है कि खुले बाजार में जहां लोकल चावल के दाम तेजी से भाग रहे हैं, वहीं कई बड़ी ब्रांडेड कंपनियों के पैकबंद (Packaged) चावल के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं।
चावल महंगे होने के पीछे ये हैं मुख्य कारण
थोक एवं खुदरा कारोबारियों के अनुसार, चावल की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे स्थानीय आपूर्ति से लेकर वैश्विक बाजार तक कई बड़े कारक जिम्मेदार हैं:
अंतरराष्ट्रीय मांग: पश्चिम एशिया (Middle East) के देशों में भारतीय चावल की मांग में लगातार इजाफा हुआ है, जिसका असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।
निर्यात बाजार में बढ़ते भाव: वैश्विक स्तर पर निर्यात कीमतें बढ़ने से व्यापारियों का रुझान बाहर की तरफ बढ़ा है।
दक्षिण भारत में सूखा और कम बारिश: कर्नाटक और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में इस साल कम बारिश और सूखे के हालात के कारण धान उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले कर्नाटक में सूखे की वजह से धान की बुआई का रकबा चार लाख हेक्टेयर से अधिक घट गया है।
लोकप्रिय किस्मों पर असर: दक्षिण भारत में उत्पादन घटने से वहां 'सोना मसूरी' और 'कोलम' जैसी लोकप्रिय चावल की किस्में महंगी हुई हैं, जिसका अप्रत्यक्ष असर अन्य बाजारों पर भी पड़ा है।
स्थानीय स्तर पर धान उत्पादक राज्य होने के बावजूद कीमतों में अचानक आई इस तेजी से आम उपभोक्ता चिंतित नजर आ रहे हैं।






