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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे लंबित विकास कार्यों की समीक्षा; बिलासपुर फ्लाईओवर प्रोजेक्ट की बाधाएं होंगी दूर

Chhattisgarh RRT News Desk 06 January 2026

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बिलासपुर शहर में दिन-ब-दिन बढ़ती ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने के लिए बहुप्रतीक्षित फ्लाईओवर प्रोजेक्ट (Bilaspur Flyover Project) अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर लगने वाले भीषण जाम से नागरिकों को निजात दिलाने के लिए राज्य शासन और जिला प्रशासन एक बड़ा फैसला लेने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, आगामी बैठक में इस प्रोजेक्ट के रूट, लागत और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा के बाद निर्माण कार्य को हरी झंडी दी जा सकती है।

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बिलासपुर की तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव के कारण वर्तमान सड़कें छोटी पड़ने लगी हैं। विशेष रूप से व्यापारिक क्षेत्रों और मुख्य मार्गों पर घंटों लगने वाले जाम ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। प्रस्तावित फ्लाईओवर प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना और दुर्घटनाओं में कमी लाना है। इस प्रोजेक्ट को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने पहले ही प्रारंभिक सर्वे पूरा कर लिया है, और अब शासन स्तर पर इसके वित्तीय आवंटन का इंतजार है।

इस महत्वपूर्ण निर्णय के अंतर्गत फ्लाईओवर के उन हिस्सों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहाँ सबसे अधिक भीड़ होती है। बताया जा रहा है कि डिजाइन में कुछ ऐसे बदलाव किए गए हैं जिससे भविष्य की जरूरतों को भी पूरा किया जा सके। प्रशासन का प्रयास है कि फ्लाईओवर का निर्माण इस तरह हो कि शहर की ऐतिहासिक और व्यावसायिक संरचनाओं को कम से कम नुकसान पहुंचे। इस बड़े फैसले के बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए निविदा (Tender) प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

शहर के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पहल का स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि बिलासपुर को 'स्मार्ट सिटी' की श्रेणी में बनाए रखने के लिए इस तरह के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सख्त जरूरत है। फ्लाईओवर बनने से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पेट्रोल और डीजल की खपत में भी कमी आएगी, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। व्यापारियों को भी उम्मीद है कि सुव्यवस्थित यातायात से उनके व्यापार में सुगमता आएगी।

आगामी बैठक में लिए जाने वाले फैसले के बाद प्रोजेक्ट की समय सीमा भी तय की जाएगी। प्रशासन की प्राथमिकता है कि निर्माण कार्य के दौरान आम जनता को कम से कम असुविधा हो और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित कर ली जाए। बिलासपुर के विकास की दिशा में यह प्रोजेक्ट एक 'गेम चेंजर' साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा दी जाने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं।

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