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बीजापुर में लाल आतंक का तांडव: नक्सलियों ने पूर्व सरपंच भीमा मडकम की गोली मारकर की हत्या; गांव में दहशत का माहौल...

Chhattisgarh RRT News Desk 21 January 2026

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बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत बीजापुर जिले में माओवादियों ने एक बार फिर कायराना करतूत को अंजाम दिया है। मंगलवार की रात नक्सलियों ने बासागुड़ा थाना क्षेत्र के काऊरगट्टा गांव के पूर्व सरपंच भीमा मडकम की गोली मारकर हत्या कर दी। नक्सलियों ने पूर्व सरपंच पर 'पुलिस मुखबिरी' का आरोप लगाते हुए इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है और ग्रामीणों में भारी दहशत है।

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घर से खींचकर ले गए बाहर, फिर मारी गोली

मिली जानकारी के अनुसार, सशस्त्र माओवादियों का एक समूह देर रात भीमा मडकम के घर पहुँचा। नक्सलियों ने उन्हें घर से बाहर निकाला और गांव के पास ही ले जाकर उन पर गोलियां बरसा दीं। मौके पर ही भीमा मडकम ने दम तोड़ दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद नक्सली जंगल की आड़ लेकर फरार हो गए। सुबह जब ग्रामीणों ने शव देखा, तब घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

मौके पर मिले नक्सली पर्चे

घटनास्थल से माओवादियों के कुछ पर्चे भी बरामद होने की खबर है। इन पर्चों में माओवादियों की बासागुड़ा एरिया कमेटी ने हत्या की जिम्मेदारी ली है। पर्चों में भीमा मडकम पर पुलिस के लिए काम करने और संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया गया है। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को निराधार बताया है और इसे निर्दोष ग्रामीणों को डराने की नक्सलियों की पुरानी रणनीति करार दिया है।

पुलिस का सर्च ऑपरेशन तेज

हत्या की सूचना मिलते ही बासागुड़ा से पुलिस बल और सुरक्षा बल के जवान मौके पर पहुँचे। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। बीजापुर एसपी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना पर सर्च ऑपरेशन (Area Domination) तेज कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने जंगलों में संदिग्ध ठिकानों पर दबिश देना शुरू कर दिया है।

जनप्रतिनिधियों पर बढ़ता खतरा

बस्तर के अंदरूनी इलाकों में पिछले कुछ महीनों में पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने की घटनाओं में तेजी आई है। बीजापुर और सुकमा जिलों में नक्सलियों द्वारा की जा रही ये टारगेट किलिंग्स क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों और सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव का नतीजा मानी जा रही है। भीमा मडकम की हत्या ने एक बार फिर स्थानीय नेताओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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