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नई शिक्षा नीति (NEP) का बड़ा कदम: चौथी और सातवीं की किताबों में शामिल होंगे योग, कला और व्यावसायिक शिक्षा
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नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूली शिक्षा में एक बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में कक्षा चौथी (IV) और सातवीं (VII) के छात्रों को नए सत्र से योग, कला और व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) जैसे महत्वपूर्ण विषय पढ़ाए जाएंगे। यह फैसला NEP के मूल सिद्धांतों को जमीन पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम है, जिसका उद्देश्य छात्रों को केवल अकादमिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक और कौशल-आधारित शिक्षा भी प्रदान करना है। इन विषयों को छात्रों के समग्र विकास (Holistic Development) को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।

इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक परिवर्तन के साथ ही, बच्चों को किताबों के बोझ से राहत देने के लिए एक और बड़ा निर्णय लिया गया है। अब हर शनिवार को स्कूलों में 'बैगलेस-डे' (Bagless Day) मनाया जाएगा। इस दिन छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई से हटकर रचनात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा। 'बैगलेस-डे' का मुख्य उद्देश्य छात्रों को खेल-कूद, कला, संस्कृति, व्यावसायिक कौशल, और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों (Co-curricular Activities) के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करना है।
NEP के तहत किए जा रहे ये बदलाव न केवल पाठ्यक्रम को अधिक प्रासंगिक बना रहे हैं, बल्कि शिक्षा के दृष्टिकोण को भी बदल रहे हैं। उदाहरण के लिए, व्यावसायिक शिक्षा को अब स्कूली स्तर पर ही अनिवार्य किया जा रहा है ताकि छात्र छोटी उम्र से ही किसी कौशल को सीख सकें, जो भविष्य में उनके करियर के लिए उपयोगी हो। इसी प्रकार, योग और कला को शामिल करने से छात्रों को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और रचनात्मकता को बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये नए विषय अगले शैक्षणिक सत्र से ही किताबों का हिस्सा बन जाएंगे। इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) द्वारा संशोधित और नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन विषयों को रोचक और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाए ताकि छात्र इन्हें बोझ न समझकर उत्साह के साथ सीखें। यह पहल बच्चों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारने पर केंद्रित है।
इन कदमों के माध्यम से केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि भारतीय शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जाए और छात्रों को रटने की प्रणाली से मुक्त करके सोचने और समझने की क्षमता विकसित की जाए। 'बैगलेस-डे' और नए विषयों का समावेशन एक ऐसी पीढ़ी तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है जो अकादमिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ जीवन कौशल और व्यावसायिक दक्षता में भी परिपूर्ण हो।







