Raipur - भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर अब सरकार और जांच एजेंसियां सख्त रुख अपना रही हैं। ताजा अपडेट के अनुसार, इस घोटाले की तह तक जाने के लिए अब एक-एक खसरा नंबर की बारीकी से जांच करने का फैसला लिया गया है। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उन जमीनों की पहचान करना है, जिन्हें कागजों में हेरफेर कर गलत तरीके से ऊंचे दामों पर अधिग्रहित दिखाया गया या जिनके मुआवजे के वितरण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है।
प्रशासनिक स्तर पर शुरू हुई इस व्यापक स्क्रूटनी में जमीन के पुराने रिकॉर्ड, म्यूटेशन और टाइटल डीड्स का मिलान किया जा रहा है। जांच टीम यह देख रही है कि क्या सड़क निर्माण के मार्ग में आने वाली कृषि भूमि को व्यावसायिक बताकर अवैध रूप से लाभ कमाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल लैंड रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर ही इस पूरे घोटाले की पोल खोलने में सबसे बड़ा हथियार साबित होगा, जिससे असली दोषियों की पहचान संभव हो सकेगी।
इस उच्चस्तरीय जांच से उन भू-माफियाओं और अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है, जिन्होंने मिलीभगत कर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाई है। आने वाले दिनों में खसरा नंबरों की इस विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर कई बड़े नामों पर गाज गिर सकती है और अवैध रूप से हड़पी गई राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए सभी दस्तावेजों को सार्वजनिक डोमेन और फोरेंसिक ऑडिट के दायरे में रखा जा रहा है।








