छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ते हुए एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। 'पुना नारकोम' अभियान के तहत की गई एक बड़ी कार्रवाई में माओवादियों के गुप्त ठिकाने (डंप) से ₹3.21 करोड़ की नगद राशि और भारी मात्रा में सोना बरामद किया गया है। यह संभवतः बस्तर के इतिहास में नक्सलियों के पास से बरामद की गई अब तक की सबसे बड़ी नगद राशि है। पुलिस के अनुसार, यह पैसा लेवी और अवैध वसूली के जरिए जमा किया गया था, जिसका उपयोग हिंसक गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए किया जाना था।
नगद और जेवरात के अलावा, सुरक्षा बलों ने हथियारों का एक विशाल जखीरा भी बरामद किया है। इसमें AK-47 राइफल, इंसास (INSAS), और एसएलआर (SLR) समेत कुल 101 आधुनिक हथियार शामिल हैं। इसके साथ ही भारी मात्रा में विस्फोटक, आईईडी (IED) बनाने की सामग्री और संचार उपकरण भी जब्त किए गए हैं। इस बरामदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि माओवादी क्षेत्र में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने की फिराक में थे, जिसे सतर्क जवानों ने समय रहते नाकाम कर दिया।
बस्तर रेंज के आईजी सुंदरराज पी. ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यह सफलता आत्मसमर्पित माओवादियों से मिली सटीक जानकारी और तकनीकी इंटेलिजेंस का परिणाम है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की वित्तीय रीढ़ तोड़ने से उनकी संगठन चलाने की क्षमता पूरी तरह प्रभावित होगी। बरामद किए गए सोने और पैसों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) या अन्य संबंधित एजेंसियों से भी कराई जा सकती है ताकि उनके फंडिंग नेटवर्क की गहराई तक पहुँचा जा सके।
राज्य सरकार की नई पुनर्वास नीति और विकास कार्यों के चलते नक्सली कैडरों में भगदड़ मची हुई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस ऑपरेशन की सराहना करते हुए कहा है कि बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प अब निर्णायक मोड़ पर है। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई के बाद सीमावर्ती इलाकों में सर्चिंग और तेज कर दी गई है। यह उपलब्धि न केवल सैन्य दृष्टि से बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी नक्सल विरोधी अभियान के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी।

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