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बांग्लादेश में हिंसा का नया दौर: हिंदू युवक की हत्या पर जमात-ए-इस्लामी ने जताया रुख

National 20 December 2025

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बांग्लादेश में एक बार फिर सांप्रदायिक तनाव चरम पर है। ताज़ा हिंसा की शुरुआत उग्रवादी संगठन 'इंकलाब मंच' के प्रवक्ता और भारत-विरोधी बयानों के लिए चर्चित नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई। हादी को 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारी गई थी, जिसकी 18 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद भड़की भीड़ ने मयमनसिंह (Mymensingh) जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपु चंद्र दास पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर उसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी और उसके शव को आग के हवाले कर दिया।

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जमात-ए-इस्लामी का बयान और शांति की अपील

इस गंभीर स्थिति पर बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान ने एक बयान जारी कर संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि "धैर्य ही मजलूमों का सबसे बड़ा हथियार है और संयम का कोई विकल्प नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि यह देश हम सभी का है और हर किसी को जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए। हालांकि, ज़मीनी हकीकत यह है कि कई विरोध प्रदर्शनों में जमात और अन्य कट्टरपंथी संगठनों के कार्यकर्ता शामिल देखे गए हैं, जहाँ भारत विरोधी नारे लगाए जा रहे हैं।

बांग्लादेशी मीडिया में भारी गुस्सा

बांग्लादेश के मुख्यधारा के मीडिया में इस हिंसा को लेकर गहरा रोष है। हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने देश के दो प्रमुख समाचार पत्रों के कार्यालयों पर हमला किया और आगजनी की। मीडिया घरानों का कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला किया जा रहा है और कट्टरपंथी ताकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अस्थिर कर रही हैं। पत्रकारों और संपादकों ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए सुरक्षा की मांग की है।

अंतरिम सरकार और मोहम्मद यूनुस का रुख

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हिंदू युवक की लिंचिंग की कड़ी निंदा की है। सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि "नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है" और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यूनुस ने शरीफ उस्मान हादी की मौत पर एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है, लेकिन साथ ही जनता से शांति बनाए रखने और कानून को हाथ में न लेने की अपील की है।

अल्पसंख्यकों में खौफ का माहौल

इस घटना ने बांग्लादेश में रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों के बीच फिर से डर का माहौल पैदा कर दिया है। इस्कॉन (ISKCON) और अन्य अल्पसंख्यक संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। भारत सरकार ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है, विशेषकर तब जब राजनयिक परिसरों और हिंदू समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है।

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