छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए कलेक्टर इन दिनों एक्शन मोड में हैं। आज जिले के 'दूध गंगा' क्षेत्र के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने जो देखा, उससे उनका पारा चढ़ गया। परिसर में न केवल भारी अव्यवस्था पाई गई, बल्कि सरकारी जमीन पर बेखौफ तरीके से किए गए अतिक्रमण ने शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रखी थीं। कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई और तत्काल प्रभाव से 'दूध गंगा' को सील करने का फरमान सुना दिया।
अतिक्रमण और गंदगी पर चला प्रशासन का डंडा
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि 'दूध गंगा' परिसर के आसपास प्रभावशाली लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया था। इसके अलावा, डेयरी और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी इस महत्वपूर्ण जगह पर साफ-सफाई का स्तर शून्य था। कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं और संपत्तियों पर किसी भी तरह का निजी कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके निर्देश पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर को अपने कब्जे में लेकर ताला जड़ दिया।
अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी
कलेक्टर की यह गाज केवल अतिक्रमणकारियों पर ही नहीं, बल्कि उन विभाग प्रमुखों पर भी गिरी है जिनकी जिम्मेदारी इस परिसर की देखरेख की थी। लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों को 'कारण बताओ नोटिस' थमा दिया गया है। कलेक्टर ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कड़ी विभागीय कार्रवाई और निलंबन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद से जिले के अन्य सरकारी विभागों में भी खलबली मची हुई है।
जनहित में कड़ा संदेश
बालोद कलेक्टर की इस कार्रवाई को आम जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है। लोगों का कहना है कि 'दूध गंगा' जैसे जनोपयोगी केंद्रों की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोगों पर ऐसी ही कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन का यह कदम यह संदेश देता है कि सरकारी तंत्र अब मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। फिलहाल, 'दूध गंगा' को सील कर दिया गया है और आगामी आदेश तक वहां किसी भी तरह की गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब प्रशासन इस पूरे क्षेत्र का नए सिरे से सीमांकन और सफाई कराने की योजना बना रहा है।








