भारतीय सिनेमा की सुप्रसिद्ध गायिका और अदाकारा सुलक्षणा पंडित के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। फिल्म जगत से लेकर छत्तीसगढ़ तक शोक की लहर है, क्योंकि सुलक्षणना पंडित केवल बॉलीवुड की एक मधुर आवाज़ नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक मिट्टी से जन्मी वह धरोहर थीं, जिनकी कला ने पीढ़ियों को प्रभावित किया।
छत्तीसगढ़ के CM विष्णुदेव साय ने उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया और सोशल मीडिया पर भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “भारतीय सिनेमा की अमर स्वर साधिका” बताया।
सीएम साय ने कहा कि, सुलक्षणना पंडित का जीवन छत्तीसगढ़ की संस्कृति और भारतीय संगीत परंपरा का अनमोल मेल था। उन्होंने याद दिलाया कि, उनका जन्म रायगढ़ की पुरानी बस्ती रामगुड़ी पारा स्थित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में हुआ था। संगीत और कला के वातावरण में पलते हुए उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रायगढ़ के पैलेस रोड स्थित शासकीय बालिका विद्यालय में प्राप्त की थी। कला के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही स्पष्ट था, क्योंकि उनका परिवार स्वयं संगीत परंपरा में गहराई से रचा-बसा था ।
सुलक्षणना पंडित ने फ़िल्म उद्योग में अपना सफर अभिनेत्री के रूप में शुरू किया। वर्ष 1975 में आई फिल्म ‘उलझन’ से उन्होंने ग्लैमरस फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उनकी अदाकारी को सराहा गया, लेकिन उनका वास्तविक जादू उनके सुरों में बसता था। 1976 में आई फिल्म ‘संकल्प’ का कालजयी गीत “तू ही सागर तू ही किनारा” ने उन्हें पहचान की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। इस गीत ने न केवल देशभर के श्रोताओं को प्रभावित किया, बल्कि उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया। यह वह दौर था जब उनकी आवाज़ लाखों दिलों की धड़कन बन चुकी थी।
अपने करियर में उन्होंने कई हिट फिल्मों में गीत दिए, जिनमें रोमांटिक, भावपूर्ण और क्लासिकल स्पर्श वाले गीत शामिल थे। उनकी आवाज़ में मिठास के साथ गहरी संवेदना थी, जो हर रचना को खास बना देती थी। 1990 के दशक में भी वे संगीत जगत में सक्रिय रहीं, और वर्ष 1996 की फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ उनका अंतिम प्लेबैक प्रोजेक्ट रहा, जिसका संगीत उनके भाइयों जतिन–ललित ने तैयार किया था।
सुलक्षणना पंडित का निजी जीवन भी उतना ही संवेदनशील रहा जितना उनका संगीत। कहा जाता है कि, वे अभिनेता संजीव कुमार से एकतरफा प्रेम करती थीं। उनके विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया। यह अध्याय उनके जीवन की भावुक और कम चर्चित कहानी है, जिसने उनकी संवेदनशीलता और एकांत को और गहराई दी।
हालांकि समय के साथ वे कैमरे और मायानगरी की हलचल से दूर होती गईं, पर उनकी आवाज़ हमेशा संगीत प्रेमियों के दिलों में गूंजती रही। उनका जीवन और कला भारतीय सिनेमा की विरासत का महत्वपूर्ण अध्याय हैं, वहीं उनकी जन्मस्थली छत्तीसगढ़ उन्हें अपनी सांस्कृतिक पहचान का एक उज्ज्वल प्रतीक मानता है।
सीएम साय ने कहा, “छत्तीसगढ़ उनकी अमर संगीत यात्रा को नमन करता है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करें।”
संगीत, अभिनय और संवेदना के सुरों से सजी सुलक्षणना पंडित की यात्रा भले ही पूर्ण हो चुकी हो, पर उनकी मधुर आवाज़ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।








