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जग्गी हत्याकांड: उम्रकैद के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अमित जोगी, 20 अप्रैल को होगी अंतिम सुनवाई

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांड में दोषी करार दिए गए जेसीसीजे (JCCJ) प्रमुख अमित जोगी ने न्याय के लिए अब देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर हाईकोर्ट) द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 20 अप्रैल 2026 को अंतिम सुनवाई की तारीख तय की है, जिसे लेकर प्रदेश के राजनीतिक और कानूनी हलकों में सरगर्मी तेज हो गई है।

हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने इसे 'अन्याय' बताया था और दावा किया था कि उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। गौरतलब है कि 2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने अमित जोगी को साल 2003 के जग्गी हत्याकांड का मुख्य मास्टरमाइंड मानते हुए उन्हें 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था। जोगी ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट से राहत की गुहार लगाई है। 20 अप्रैल को होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि उन्हें हाईकोर्ट के सरेंडर के आदेश से अंतरिम राहत मिलती है या नहीं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जग्गी परिवार और सीबीआई की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 20 साल बाद फैसला आया है। जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने हाईकोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताया था। अब सबकी निगाहें दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। अमित जोगी के वकीलों का तर्क है कि निचली अदालत ने उन्हें पहले ही बरी कर दिया था, जिसे हाईकोर्ट ने बिना उचित आधार के पलट दिया। वहीं, विपक्षी खेमा और जग्गी परिवार उम्मीद कर रहा है कि सर्वोच्च अदालत हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखेगी।







