मुंगेली: छत्तीसगढ़ के गौरव और बाघों के बसेरे अचानकमार टाइगर रिजर्व में प्रबंधन की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जंगल के अंदर बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए हाई-टेक ट्रैप कैमरों से अज्ञात बदमाशों ने मेमोरी कार्ड चोरी कर लिए हैं। इस घटना ने न केवल वन विभाग की गश्त पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि बाघों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
बाघों का मूवमेंट डेटा हुआ गायब
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, कोर एरिया और बफर जोन के संवेदनशील इलाकों में ये कैमरे लगाए गए थे। इन कैमरों के जरिए बाघों की लोकेशन, उनके शिकार करने के पैटर्न और शावकों की गतिविधियों का डेटा इकट्ठा किया जाता है। मेमोरी कार्ड चोरी होने से पिछले कई हफ्तों का महत्वपूर्ण डेटा हमेशा के लिए खत्म हो गया है। आशंका जताई जा रही है कि शिकारियों या असामाजिक तत्वों ने अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से इस वारदात को अंजाम दिया है।
क्या शिकारियों की है ये साजिश?
इस चोरी के पीछे किसी बड़े गिरोह का हाथ होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कैमरों की लोकेशन का पता होना और केवल मेमोरी कार्ड निकालना यह दर्शाता है कि अपराधी को जंगल के रास्तों और कैमरों की स्थिति की सटीक जानकारी थी। यदि यह डेटा शिकारियों के हाथ लगता है, तो वे बाघों की सटीक लोकेशन जानकर उन्हें निशाना बना सकते हैं।
जांच में जुटा वन विभाग
मामला सामने आने के बाद एटीआर (ATR) प्रबंधन ने संबंधित बीट गार्ड और सुरक्षा कर्मियों से जवाब-तलब किया है। फील्ड डायरेक्टर ने मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, आस-पास के गांवों में संदिग्धों की तलाश की जा रही है। वन विभाग अब इन कैमरों को अधिक सुरक्षित स्थानों पर लगाने और उन पर अतिरिक्त लॉक सिस्टम इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है।
लापरवाही या सुरक्षा में चूक?
अचानकमार में पहले भी वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इतने बड़े संरक्षित क्षेत्र में जहां करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वहां कैमरों के साथ छेड़छाड़ होना गश्ती दल की सक्रियता पर बड़ा सवालिया निशान है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल के अंदर बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगाने में विभाग नाकाम रहा है।








