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माओवादी खतरे के बीच विकास की जीत, बालाघाट में 61 किमी चुनौतीपूर्ण सड़क का निर्माण पूरा

बालाघाट। मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में माओवादी हिंसा और धमकियों के बावजूद विकास ने जीत हासिल की है। लांजी से सालेटेकरी क्षेत्र को जोड़ने वाली करीब 61 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। यह सड़क लंबे समय से इलाके के ग्रामीणों की बड़ी जरूरत थी।

सड़क निर्माण के दौरान माओवादी संगठन ने कई बार काम रोकने की कोशिश की। शुरुआती चरण में निर्माण कार्य में लगे पांच वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिससे ठेकेदार और मजदूरों में दहशत फैल गई थी। इसके बावजूद न तो प्रशासन पीछे हटा और न ही निर्माण कार्य को रोका गया।
धमकियों के बावजूद जारी रहा काम
सूत्रों के अनुसार, निर्माण एजेंसी को लगातार धमकियां मिल रही थीं और काम बंद करने का दबाव बनाया जा रहा था। बावजूद इसके, सुरक्षा बलों की मौजूदगी में सड़क निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया गया। पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाए रखा, जिससे मजदूरों ने बिना डर के काम पूरा किया।
ग्रामीणों को मिलेगा सीधा फायदा
सड़क बनने से दर्जनों गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। अब ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार तक पहुंचने में आसानी होगी। पहले जहां खराब रास्तों के कारण कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था, वहीं अब वाहन सुविधा शुरू हो सकेगी।
प्रशासन ने बताया विकास की बड़ी उपलब्धि
प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में विकास की बड़ी उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में भी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी बाधा के पहुंचाई जाएं।
इलाके में उत्साह का माहौल
सड़क पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क उनके लिए सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद है।
प्रशासन ने साफ किया है कि माओवादी दबाव के बावजूद विकास कार्य नहीं रुकेंगे और आने वाले समय में क्षेत्र में और भी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।







