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Mahasamund : महासमुंद में किसान का हृदयविदारक कदम: धान का टोकन न कटने से तंग आकर ब्लेड से काटा गला

Mahasamund : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो किसानों की बुनियादी समस्याओं को उजागर करती है। ग्राम सेनभाठा के 65 वर्षीय किसान मनबोध ने धान बेचने के लिए टोकन न कटने की त्रासदी से तंग आकर शुक्रवार सुबह अपने गले पर ब्लेड चला लिया। किसान की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागबाहरा में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें महासमुंद मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, और अब रायपुर के किसी बड़े अस्पताल में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है। यह घटना राज्य में चल रही धान खरीदी प्रक्रिया की खामियों पर सवाल खड़े कर रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, 5 दिसंबर (शुक्रवार) की सुबह करीब 8 बजे मनबोध गांडा अपने घर से गाय चराने निकले थे। पिछले तीन दिनों से वे स्थानीय च्वाइस सेंटर का चक्कर लगा रहे थे, जहां धान बेचने के लिए ‘तुंहर टोकन’ ऐप के माध्यम से टोकन कटवाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन सर्वर की समस्या या अन्य तकनीकी खराबी से टोकन न कट पाने से वे बेहद परेशान हो गए। निराश होकर लौटते हुए उन्होंने घर के पास ही ब्लेड से अपना गला काट लिया। ग्रामीणों ने चीख-पुकार सुनकर उन्हें तुरंत 112 एम्बुलेंस से बागबाहरा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
मनबोध के पास मात्र 1 एकड़ 40 डिसमिल कृषि भूमि है, जिससे वे अपनी आजीविका चलाते हैं। धान खरीदी का सीजन होने पर टोकन न मिलने से उनकी फसल बेचने की उम्मीदें चूर हो गईं। परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जो इस घटना से सदमे में हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, गले पर गहरा घाव है और खून बहना बंद नहीं हुआ। रक्त की कमी और इंफेक्शन का खतरा है। रायपुर के मेकाहार्ट या AIIMS में रेफरल की प्रक्रिया चल रही है।
यह घटना छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की शुरुआत (15 नवंबर 2025 से) के बाद से किसानों की बढ़ती निराशा को दर्शाती है। राज्य सरकार ने ‘तुंहर टोकन’ ऐप लॉन्च किया था, जिससे किसान घर बैठे टोकन कटवा सकें—सीमांत किसानों को 1, लघु को 2 और बड़े को 3 टोकन की सीमा। लेकिन सर्वर डाउन, ऐप की धीमी स्पीड और ग्रामीण इलाकों में स्मार्टफोन की कमी से हजारों किसान परेशान हैं।







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