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₹79,000 करोड़ की डिफेंस डील को मिली मंजूरी: डिफेंस स्टॉक्स पर रखें नज़र, जानें ब्रोकरेज के टारगेट

National RRT News Desk 24 October 2025

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नई दिल्ली: रक्षा क्षेत्र में 'मेक इन इंडिया' को बड़ा बूस्ट मिला है। डिफेंस एक्वीजिशन काउंसिल (DAC) ने भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण रक्षा संसाधनों की खरीद हेतु ₹79,000 करोड़ के रक्षा खरीद मसौदे को मंजूरी दे दी है। इस नवीनतम मंजूरी के साथ, वित्त वर्ष 2026 में अब तक DAC द्वारा अनुमोदित कुल रक्षा खरीद राशि ₹2.5 लाख करोड़ को पार कर गई है।

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सरकार का फोकस घरेलू रक्षा उत्पादन पर होने के कारण यह खबर घरेलू डिफेंस कंपनियों और निवेशकों के लिए बेहद सकारात्मक है। मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकर्स ने इस सेक्टर के स्टॉक्स पर अपनी 'खरीद' की सलाह को बरकरार रखा है।

किन कंपनियों को मिलेगा फायदा?

एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, ₹79,000 करोड़ की इस खरीद को मंजूरी मिलने का सीधा फायदा PTC Industries, Mazagon Dock Shipbuilders, Hindustan Aeronautics (HAL), Bharat Electronics (BEL), Bharat Dynamics (BDL) समेत अन्य प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को मिलेगा।

ब्रोकरेज ने निवेशकों को Mazagon Dock Shipbuilders, HAL, BEL, BDL, Zen Technologies, Solar Industries और PTC Industries जैसे शेयरों पर 'खरीद' की सलाह बनाए रखने को कहा है।

घरेलू खरीद 92% के रिकॉर्ड स्तर पर

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकार के 'मेक इन इंडिया' पर ज़ोर के कारण डोमेस्टिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का आउटलुक दमदार बना हुआ है।

FY19 में भारत का डोमेस्टिक डिफेंस प्रोक्योरमेंट 54% था, जो FY25 में बढ़कर 92% पर पहुंच चुका है।

FY26 के लिए डिफेंस बजट ₹6.8 लाख करोड़ है, जिसमें से ₹1.8 लाख करोड़ (28%) पूंजीगत खरीद (कैपिटल एक्वीजिशन) के लिए आवंटित है।

एंटीक ब्रोकिंग का मानना है कि बजट की कोई समस्या नहीं होगी और आने वाले समय में डिफेंस कैपेक्स (पूंजीगत व्यय) में डबल डिजिट में ग्रोथ होने की उम्मीद है।

प्रोक्योरमेंट प्रोसेस को बनाया जा रहा तेज

रक्षा मंत्रालय खरीद प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुव्यवस्थित और तेज बनाने पर काम कर रहा है। इसके लिए सितंबर महीने में डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल (DPM) को रिवाइज किया गया है, और दिसंबर तक डिफेंस एक्वीजिशन प्रोसिजर (DAP) को भी रिवाइज करने की योजना है। इसका सीधा मकसद खरीद प्रक्रिया को रफ्तार देना है।

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