Breaking

आयोग की समझाइश पर कुल 6 मामलों में हुआ सुलहनामा

Chhattisgarh 08 January 2026

post


Advertisement

सोच-समझकर करें दूसरा विवाह- आयोग।


NPA अकाउंट में बैंक से सुलहनामा का प्रयास कराया जायेगा।


4 महिलाओं से धोखाधड़ी करने, नौकरी लगाने के नाम पर 31 लाख की ठगी करने वालो पर FIR करने भेजा।


रायपुर/08 जनवरी 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 357 वी. एवं रायपुर जिले में 173 वी. जनसुनवाई की गई।


आज के एक प्रकरण में उभय पक्षों की 5 वर्ष और 9 माह की 2 संताने है। अनावेदक ने बताया कि दिल्ली के 2022 में आर्य समाज, गुड़गांव मंदिर में विवाह हुआ था। जिसका दस्तावेज अनावेदक फाड दिया इस स्तर पर आवेदिका ने बताया कि अनावेदक पटवारी है। अनावेदक ने धोखा दिया जबकि अनावेदक पूर्व में विवाहित था। उनके 2 पुत्र है। अनावेदक को यह पता है कि दूसरा विवाह करना पूरी तरह अवैध होता है और उसकी शासकीय सेवा समाप्त हो सकती है। इसी स्तर पर अनावेदक ने बताया कि बड़ी बेटी पूर्व पति की बच्ची है। वह केवल दूसरी बच्ची का पिता है। और वह दूसरी बच्ची के लीवर ट्रांसप्लांट करने का खर्च और जिम्मा स्वयं वहन करेगा। लीवर ट्रांसप्लांट के लिए 25 लाख रू. की जरूरत है। उसकी व्यवस्था भी अनावेदक स्वयं करेगा। 1 माह तक अनावेदक सारी व्यवस्था करें और बच्ची का इलाज मे कब कैसे आॅपरेशन होना है उसकी विस्तृत जानकारी आयोग की सदस्य जी को देंगे। उसके बाद प्रकरण मे आगे की कार्यवाही की जावेगी।


एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अनावेदक के विरूध्द गंभीर शिकायत कि है उसने बताया कि लगभग 4 लोगो के साथ अनावेदक ने आवेदिका का बलात्कार किया था। जिसके परिणामस्वरूप एक बच्ची का जन्म हुआ। आवेदिका बच्ची और अनावेदक का डीएनए टेस्ट करवाना चाहती है। 


क्योंकि अन्य 4 अनावेदकगणों का नाम आवेदिका को पता नहीं है। लेकिन घटना दिनांक को उन्ही मे से किसी व्यक्ति ने आवेदिका की फोटो खींचकर आवेदिका के पति के फेसबुक पर डाल दिया। जिसके आधार पर दो लोगो के खिलाफ साईबर थाना मे रिपोर्ट भी दर्ज हुई है। जिसकी जानकारी मंगाया जायेगा व उनका भी डीएनए टेस्ट करवाया जायेगा। अनावेदक व आवेदिका की पुत्री का डीएनए टेस्ट करवाये जाने हेतु रायपुर कलेक्टर व सीएमएचओ रायपुर को पत्र प्रेषित किया जायेगा। इसके पश्चात् आगे की कार्यवाही की जा सकेगी।



एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने अपनी बहू के खिलाफ शिकायत अपने बेटे को बचाने के लिए मामला प्रस्तुत किया था। जबकि आवेदिका का बेटा 2-3 औरतो के साथ रहता है जिसकी फोटो संलग्न किया गया है। एक बेटी आवेदिका के बेटे के साथ रहती है और अनावेदिका को कोई भरण-पोषण नही देते है। आयोग ने समझाईश दिया कि अनावेदिका (बहू) आवेदिका और उसके बेटे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है और आवश्यकतानुसार न्यायालय मे मामला दर्ज करा सकती है।

एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया की आवेदिका के पति की मृत्यु के पहले पति ने लगभग 2015-2016 में बैंक से व्यवसाय के लिए लोन लिया था। लेकिन 2022 में आवेदिका के पति की मृत्यु हो जाने और आवेदिका के पास रोजगार का साधन नहीं होने से लोन पटाया नही जा सका। आवेदिका के 2 बच्चे, सास व लकवा ग्रस्त ससुर है। आवेदिका ही सभी का पालन-पोषण वर्तमान में स्कूल में आया का काम करके करती है। लोन के एवज में आवेदिका का मकान अनावेदक बैंक के पास गिरवी रखा है जो एकाउंट एनपीए हो गया है। लोन का मूलधन 11 लाख ब्याज सहित 16 लाख रू. होता है। अनावेदक ने आयोग के समक्ष व्यक्त किया कि आवेदिका की परिस्थिति को देखते हुए ब्याज माफ कर मूलधन 11 लाख रू. आवेदिका को देना होगा। आवेदिका ने अपने परिवार से सहयोग लेकर साढे 6 से 7 लाख रू. ही दे पाने का प्रस्ताव रखा है। आयोग के द्वारा उभय पक्षों को सुना गया और अनावेदक बैंक की ओर से उपस्थित ब्रांच मैनेजर को समझाईश दिया कि आवेदिका की पारिवारिक आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए मूलधन राशि में छूट दिलाने हेतु प्रयास करें इस पर अनावेदक ने एक समय की मांग की। आवेदिका को भी समझाईश दिया गया कि वह मूलधन लौटाने के लिए अपने पारिवारिक स्तर पर तैयारी करें इस हेतु उभय पक्ष को 02 माह का समय दिया गया।

अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि आवेदिका व अनावेदक का दूसरा विवाह है जो मई 2025 में हुआ था। विवाह के 3 माह बाद से ही दोनो अलग रह रहे है। दोनो के मध्य सुलह हेतु काफी प्रयास किया गया आवेदिका साथ रहने के लिए तैयार है लेकिन अनावेदक ने एकमुश्त भरण-पोषण देकर आपसी राजीनामा से तलाक का प्रस्ताव रखा है जिसपर आवेदिका अभी सहमत नहीं है। वह चाहती है उसके सास-ससुर भी सुनवाई में उपस्थित हो उसके बाद ही चर्चा किया जाये। अनावेदक को आयोग की ओर से समझाईश दिया गया कि वह अपने माता-पिता को लेकर आयोग मे उपस्थित हो ताकि प्रकरण का निराकरण किया जा सके।


एक प्रकरण में अनावेदिका ने आवेदिका क्र.1 से 6 लाख, आवेदिका क्र.2 से 5 लाख, आवेदिका क्र.3 से 10 लाख व आवेदिका क्र.4 से 10 लाख रू. आवेदिकागणों के परिवारजनों को नौकरी लगाने के नाम पर लिया था और कहा था कि जिंदल कंपनी में नौकरी लगवा देंगे। आवेदिकागणों ने भरोसा करके अनावेदिका को पैसे दिये लेकिन अनावेदिका ने नौकरी नहीं लगवाई और आवेदिकागणों के पैसे भी वापस नहीं किये। अनावेदिका के खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर धोखाधड़ी व षड्यंत्र किये जाने पर कड़ी कार्यवाही कर आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया व अनावेदकगणों के थाना-सारागांव, जिला- जांजगीर-चांपा को कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया।

You might also like!