CG News - भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही राजधानी रायपुर के 35 वार्डों में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। शहर के एक बड़े हिस्से में नलों से पानी नहीं आने या कम दबाव (Low Pressure) की समस्या के कारण लोगों का बुरा हाल है। कई बस्तियों में सुबह से ही लोग पानी के लिए बाल्टियाँ और बर्तन लेकर कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं। पाइपलाइन में लीकेज और गिरते भूजल स्तर ने नगर निगम की चिंताओं को बढ़ा दिया है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
टैंकरों के भरोसे प्यास बुझाने की मजबूरी
जल संकट की गंभीरता को देखते हुए महापौर एजाज ढेबर ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने जानकारी दी कि जिन वार्डों में पानी की सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित है, वहां नगर निगम की टीम तत्काल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित कर रही है। महापौर ने पार्षदों और निगम अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी मोहल्ले में पानी के लिए अफरा-तफरी न मचे। वर्तमान में शहर के कई हिस्सों में निगम के टैंकर दिन-रात चक्कर लगा रहे हैं ताकि लोगों को राहत मिल सके।
डेढ़ करोड़ रुपये का हुआ विशेष टेंडर
पानी की सप्लाई को व्यवस्थित करने और टैंकरों के प्रबंधन के लिए नगर निगम ने 1.5 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इस बजट का उपयोग नए टैंकरों की व्यवस्था, मौजूदा टैंकरों के रखरखाव और किराए पर लिए गए वाहनों के भुगतान के लिए किया जाएगा। प्रशासन का दावा है कि इस राशि से गर्मियों के दौरान पानी के वितरण तंत्र को मजबूत किया जाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इतनी बड़ी राशि के बावजूद कई इलाकों में टैंकर नहीं पहुँचने के आरोप लगाए हैं।
अमृत मिशन और पुरानी पाइपलाइन का पेच
शहर में 'अमृत मिशन' के तहत नई पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है, लेकिन पुरानी पाइपलाइनों में बार-बार हो रहे ब्रेकेज और लीकेज की वजह से पानी की बर्बादी हो रही है। महापौर ने अधिकारियों को सख्त लहजे में कहा है कि जहां भी पाइपलाइन खराब है, उसे युद्ध स्तर पर ठीक किया जाए। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि पानी का अपव्यय न करें और संकट की इस घड़ी में निगम का सहयोग करें। फिलहाल, रायपुर की जनता टकटकी लगाए बैठी है कि कब उन्हें नलों से पर्याप्त पानी मिलना शुरू होगा।








